ग्रामीण भारत में 3.33 लाख वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित, लेकिन क्या यह सुविधा मुफ्त होगी या वसूली का नया जरिया?
नई दिल्ली, 24 जुलाई 2025: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आज एक शानदार घोषणा के साथ सुर्खियां बटोरी हैं। पार्टी ने दावा किया कि देशभर में 3,33,300 पीएम-वाणी वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जा चुके हैं, जो ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा है, जिसे दिसंबर 2020 में शुरू किया गया था। बीजेपी के अनुसार, यह कदम ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और छोटे दुकानदारों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। 2023 के भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के एक अध्ययन के मुताबिक, इस योजना के लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट उपयोग में 15% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके अलावा, 2014 में जहां केवल 25 करोड़ भारतीयों के पास इंटरनेट सुविधा थी, वहीं आज यह आंकड़ा 97 करोड़ से अधिक हो गया है। यह उपलब्धि 42 लाख किलोमीटर लंबे ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की बदौलत संभव हुई है, जो पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी के 11 गुना के बराबर है, जैसा कि 2025 की प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) रिपोर्ट में उल्लेखित है।
हालांकि, इन उपलब्धियों के बीच एक सवाल हर किसी के जहन में है: क्या यह वाई-फाई सुविधा वाकई मुफ्त होगी, या सरकार इसे भी "वसूली का नया हथियार" बना रही है? पीएम-वाणी योजना के तहत छोटे दुकानदारों को हॉटस्पॉट चलाने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि इन दुकानदारों को इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से जोड़ने और रखरखाव के लिए खर्च उठाना पड़ रहा है। 2023 में iSPIRT द्वारा प्रकाशित एक विश्लेषण में बताया गया कि इस योजना की प्रगति धीमी रही है, क्योंकि लाभप्रदता और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र की कमी ने इसे प्रभावित किया है। इसके अलावा, कई राज्यों में ग्राहकों से शुल्क वसूली की शिकायतें भी सामने आई हैं, जो इस योजना के "सस्ती कनेक्टिविटी" के दावे पर सवाल उठाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम-वाणी योजना की सफलता तभी संभव है, जब सरकार बुनियादी ढांचे की लागत को सब्सिडी दे और शुल्क मुक्त या न्यूनतम शुल्क वाली नीति अपनाए। 2025 तक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 9 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें ग्रामीण भारत 56% का योगदान देगा, लेकिन इसके लिए विश्वसनीय और किफायती कनेक्टिविटी जरूरी है। सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि छोटे दुकानदारों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता मिले, ताकि वे इस योजना का लाभ उठा सकें।


