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मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 248 का खुला उल्लंघन भीमपुर तहसीलदार नहीं निभा पा रहे हैं अपनी वैधानिक जिम्मेदारी

संवाददाता – पप्पू काकोड़िया, भीमपुर | जिला बैतूल (म.प्र.)

भीमपुर तहसील में शासकीय एवं निजी भूमि पर हो रहे अतिक्रमण के मामलों में मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 का खुलेआम उल्लंघन सामने आ रहा है। आरोप है कि तहसीलदार द्वारा कानूनन प्रदत्त अधिकारों के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

वरिष्ठ समाजसेवी रामा काकोड़िया ने बताया कि धारा 248 के अंतर्गत तहसीलदार को शासकीय भूमि से अवैध कब्जा हटाने, जुर्माना लगाने एवं बेदखली की संपूर्ण शक्ति प्राप्त है। वहीं, धारा 248(2-ए) में सात दिन से अधिक समय तक अवैध कब्जा बनाए रखने पर सिविल जेल तक का प्रावधान है। इसके बावजूद भीमपुर तहसील में अतिक्रमणकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।••••••निजी आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जा, प्रशासन मौन••••रामा काकोड़िया ने बताया कि एक गंभीर प्रकरण में आवेदक की निजी भूमि खसरा क्रमांक 194/5/1, रकबा 0.202 हेक्टेयर पर गैर-आदिवासी अनावेदकों द्वारा अवैध रूप से 7 दुकानों का कॉम्प्लेक्स निर्मित कर किराए पर देकर व्यवसाय किया जा रहा है। यह निर्माण वर्ष 2018-19 में किया गया था।आवेदक द्वारा अतिक्रमण रोकने एवं हटाने के लिए समय-समय पर तहसीलदार एवं जिला प्रशासन को लिखित आवेदन दिए गए, परंतु आज दिनांक तक कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन जानबूझकर मामले को नजरअंदाज कर रहा है।  राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पत्र का भी नहीं मिला जवाब-- समाजसेवी काकोड़िया ने बताया कि इस प्रकरण को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को भी पत्राचार किया गया था, जिसका 15 दिनों के भीतर जवाब देना अनिवार्य है, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा अब तक कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। यह सीधे-सीधे संवैधानिक संस्थाओं की अवहेलना है।  """""अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी दिखावटी""""भीमपुर में वर्तमान में जो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है, वह भी विधि अनुसार नहीं की जा रही। चयनात्मक कार्रवाई से यह संदेश जा रहा है कि प्रशासन कुछ प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दे रहा है। परिणामस्वरूप अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं और आम ग्रामीणों का शासन-प्रशासन से भरोसा उठता जा रहा है।  •••••••जनसुनवाई भी बनी औपचारिकता•••••••••••••••वरिष्ठ समाजसेवी ने कहा कि जनसुनवाई अब केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गई है। अतिक्रमण हटाने को लेकर जनसुनवाई में दिए गए आवेदनों पर भी कोई ठोस निर्णय या कार्रवाई नहीं हुई।   प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल? पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भीमपुर तहसील में कानून का पालन नहीं, बल्कि उसकी अनदेखी हो रही है। यदि समय रहते निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्थिति आदिवासी भूमि अधिकारों एवं कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

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