कांकेर में 'बुढ़हाल पेन करसाड़ एवं मांदरी महोत्सव' का भव्य आयोजन, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की संस्कृति संरक्षण की पहल की सराहना
June 05, 2025
कांकेर, 05 जून 2025: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के ग्राम कराठी (संबलपुर) में दो दिवसीय 'बुढ़हाल पेन करसाड़ एवं मांदरी महोत्सव' का आयोजन बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इस पारंपरिक जनजातीय महोत्सव का समापन समारोह आज आयोजित किया गया, जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने गांव-गांव से पधारे देवी-देवताओं और आंगा देवता की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और इस सांस्कृतिक आयोजन की महत्ता को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समुदाय प्राचीन काल से प्रकृति और अपने देवी-देवताओं की आराधना करता आ रहा है। उन्होंने कहा, "हमारा आदिवासी समुदाय अपनी सांस्कृतिक चेतना, श्रद्धा और परंपराओं के लिए पूरे देश में जाना जाता है। 'बुढ़हाल पेन करसाड़ एवं मांदरी महोत्सव' जैसे आयोजन इन परंपराओं को संजोने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम हैं। यह महोत्सव हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और हमें हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का अवसर देता है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को उनके पुरखों की परंपराओं और जीवनशैली से परिचित कराने का एक अनूठा मंच प्रदान करते हैं, जो आधुनिकता के दौर में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस दो दिवसीय महोत्सव में कांकेर जिले के विभिन्न गांवों से आए जनजातीय समुदाय के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन स्थल को मराठा फूलों की मालाओं और रंग-बिरंगे झंडों से सजाया गया था। मंच पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोग उत्साह से भरे हुए थे, और चारों ओर ढोल-नगाड़ों की धुनें गूंज रही थीं। आयोजन के दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी पारंपरिक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां दीं। विशेष रूप से, जनजातीय नृत्य जैसे 'राउत नाचा' और 'मांदरी नृत्य' ने दर्शकों का मन मोह लिया। इसके अलावा, विभिन्न गांवों से आए आंगा देवता और अन्य देवी-देवताओं की पूजा का आयोजन भी किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। पूजा के दौरान पारंपरिक मंत्रोच्चार और भक्ति भजनों ने वातावरण को और भी पवित्र बना दिया।
इस अवसर पर कांकेर के सांसद श्री भोजराज नाग, विधायक श्री विक्रमदेव उसेंडी, श्री आशाराम नेताम, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। श्री भोजराज नाग ने अपने संबोधन में कहा, "यह महोत्सव न केवल हमारी संस्कृति को जीवित रखता है, बल्कि यह हमें एकजुटता और भाईचारे का संदेश भी देता है। कांकेर का यह आयोजन पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक मिसाल है।" वहीं, विधायक श्री विक्रमदेव उसेंडी ने कहा कि इस तरह के आयोजन स्थानीय समुदाय को अपनी पहचान को मजबूत करने का अवसर देते हैं और साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद करते हैं।
महोत्सव के दौरान कई सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं। एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें जनजातीय समुदाय की कला, हस्तशिल्प और परंपरागत वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी में स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए बांस के हस्तशिल्प, मिट्टी के बर्तन, और पारंपरिक गहने आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा, युवाओं और बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें पारंपरिक खेल जैसे 'गेड़ी दौड़', तीरंदाजी, और नृत्य प्रतियोगिताएं शामिल थीं। इन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार भी दिए गए, जिन्हें मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने प्रदान किया। इस दौरान एक बच्चे को प्रमाण पत्र देते हुए मुख्यमंत्री ने उसकी प्रतिभा की सराहना की और उसे भविष्य में भी अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा दी।
यह आयोजन छत्तीसगढ़ सरकार की उस पहल का हिस्सा है, जो राज्य की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा देने और इसे संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ में 30% से अधिक आबादी जनजातीय समुदाय से है, और यह समुदाय अपनी अनूठी परंपराओं, नृत्य, संगीत और जीवनशैली के लिए जाना जाता है। इस तरह के आयोजन न केवल सांस्कृतिक संरक्षण में मदद करते हैं, बल्कि स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं। 'मांदरी महोत्सव' जैसे उत्सव छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने का एक शानदार अवसर प्रदान करते हैं, खासकर मानसून के बाद जब इस क्षेत्र के जंगल और झरने अपनी पूरी शोभा में होते हैं।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर यह भी बताया कि उनकी सरकार आदिवासी समुदाय के विकास और मुख्यधारा में शामिल करने के लिए कई कदम उठा रही है। उन्होंने हाल ही में बस्तर क्षेत्र में शुरू की गई योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक बस्तर से दशकों पुरानी उग्रवाद की समस्या को खत्म करना और क्षेत्र के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के क्षेत्र में कई योजनाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से समुदायों को एकजुट करना और उनकी पहचान को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने हाल ही में मांदरी गांव में 28 मई 2025 को आयोजित 'सुशासन महोत्सव' का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल सांस्कृतिक संरक्षण में मदद करते हैं, बल्कि लोगों को सरकार की योजनाओं से जोड़ने और उनके जीवन को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समापन समारोह में उपस्थित जनजातीय समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उन्हें पारंपरिक पगड़ी और शॉल पहनाकर सम्मानित किया गया। इस आयोजन ने न केवल स्थानीय समुदाय को एक मंच प्रदान किया, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने में भी मदद की।
फोटो: समापन समारोह में मंच पर बोलते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पारंपरिक वेशभूषा में सजे हुए। एक अन्य तस्वीर में सांसद भोजराज नाग, विधायक विक्रमदेव उसेंडी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ मंच पर हाथ उठाकर अभिवादन करते हुए। तीसरी तस्वीर में मुख्यमंत्री द्वारा एक बच्चे को पुरस्कार वितरण करते हुए।




