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स्वतंत्रता सेनानी रेंगा कोरकू ने कहा था - जो जमीन सरकारी है वह जमीन हमारी है

देवास। जयस बिरसा ब्रिगेड देवास द्वारा स्वतंत्रता सेनानी टंट्या भील के विश्वसनीय साथी वीर क्रांतिकारी शहीद रेंगा कोरकू की 180 वी जयंती कावेरी पार्क सिंगावदा में मनाई गई। सर्वप्रथम तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया तत्पश्चात वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता राकेश देवडे बिरसावादी द्वारा क्रांतिकारी रेंगा कोरकू की जीवनगाथा पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि रेंगा कोरकू का जन्म पूर्वी निमाड़ अंचल खंडवा जिले के ग्राम सोनखेड़ी तहसील हरसूद में 22 जुलाई 1845 को कोरकू आदिवासी मजदूर परिवार में हुआ था। उनके पिताजी का नाम लाल था।बचपन से ही प्राकृतिक माहौल में रहने के साथ-साथ पशु पक्षियों जंगली जानवरों से बात करने का अनोखा ज्ञान प्राप्त था।

टंट्या भील और रेंगू कोरकू की पहली बार मुलाकात सतपुड़ा पर्वतमाला के अंतर्गत मेलघाट के घने जंगलों में 15 नवंबर 1878 मे हुई थी।टंट्या भील और रेंगू  कोरूकू ने आदिवासियों को एकजुट करके लगातार 11 साल तक अंग्रेजी सत्ता को लोहे के चने चबाने पर मजबूर किया।अंग्रेजों ने अपने रिकॉर्ड में इस बात को रेखांकित किया कि रेंगू कोरकू टंट्या भील के प्रति कृतज्ञ है।वीर रेंगू कोरकू सही मायने में राष्ट्र के महान जननायक थे। उन्होंने टंट्या भील के साथ मिलकर विंध्याचल सतपुड़ा निमाड़ की एक लाख 27 हेक्टेयर जमीन जमीदारों साहूकारों से वापस छीन कर आदिवासियों तथा भूमिहीन लोगों को दी।इन दोनों योद्धाओं ने सरकार  को  भी जमीन दी। ब्रिटिश गजट रिपोर्ट के आधार पर टंट्या भील और रेंगू कोरकू 2700 गांव का नेतृत्व करते थे और 2700 को गांव की ग्राम सभा का एक ही दिन एक ही समय में आयोजित करते थे। जिसकी रिपोर्ट ब्रिटिश गवर्नर को जाती थी। कई पत्र ब्रिटिश गवर्नर को भेजे जाते रहे। ब्रिटिश गवर्नर के द्वारा समस्त रिपोर्ट को अपडेट किया गया उन्हीं रिपोर्ट के आधार पर यूनाइटेड किंगडम ने आदिवासियों की परंपरा रीति-रिवाज संस्कृति गांव में कायदा कानून को लागू करने संबंधित अपडेट रिकॉर्ड के आधार पर गैर न्यायिक (नान ज्यूडिशियल) कोर्ट बनाई। इसलिए आदिवासियों के रूढीप्रथा व्यवस्था परंपरा को बहुत आदर सम्मान दिया जाता है।

रेंगा कोरकू ने न केवल आदिवासी समुदाय की जल जंगल जमीन संस्कृति बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे।इस अवसर पर विष्णु मोरे, बाबू रावत ,अनिल बरला, रवि गामड़,पालसिंह अलावे, किशोर बरला, मुकेश सोलंकी,माखन लोहारिया,संदीप ठाकुर,पप्पू सोलंकी इत्यादि के साथ समाजजन उपस्थित थे।

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