आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन एवं जनजागृति रैली का भव्य आयोजन जामगेट, मंडलेश्वर से हुआ शुभारंभ
प्रदेश संवाददाता: गेंदालाल माकोडे़, मंडलेश्वर (खरगोन)
आदिवासी समाज की सांस्कृतिक एकता, संवैधानिक अधिकारों एवं सामाजिक जागरूकता को सशक्त करने के उद्देश्य से 13, 14 एवं 15 जनवरी 2026 को ग्राम चैनपुरा, तहसील नेपानगर, जिला बुरहानपुर (म.प्र.) में आयोजित होने वाले आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन के अंतर्गत “आदिवासी बचाओ यात्रा” एवं “संविधान बचाओ यात्रा” के तहत जनजागृति रैलियों का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
इसी क्रम में एक प्रमुख जनजागृति रैली का शुभारंभ महेश्वर तहसील के ऐतिहासिक प्रवेश द्वार जामगेट से किया गया। यह द्वार माता अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित है। रैली का संयोजन श्रीमती बसंती गजराज द्वारा किया गया। रैली जामगेट से प्रारंभ होकर महेश्वर तहसील क्षेत्र में प्रवेश करते हुए आगे बढ़ी।
जानकारी के अनुसार देवास, धार, बड़वानी एवं इंदौर जिलों से अलग–अलग मार्गों से जनजागृति रैलियाँ निकाली जा रही हैं। इनमें से एक रैली का रात्रि विश्राम धामनोद (जिला धार) में प्रस्तावित है। सभी रैलियाँ 12 जनवरी सोमवार की शाम अथवा 13 जनवरी मंगलवार को कार्यक्रम स्थल चैनपुरा पहुँचेंगी।
यह महासम्मेलन प्रतिवर्ष देश के किसी एक आदिवासी बहुल राज्य में इन्हीं तिथियों में आयोजित किया जाता है, जिसमें देश-विदेश से आदिवासी समाज के गणमान्य नागरिक भाग लेकर समाज के उत्थान, अधिकारों एवं सांस्कृतिक संरक्षण पर अपने विचार रखते हैं। इस वर्ष यह 33वां आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन बुरहानपुर जिले में आयोजित हो रहा है।
रैली में प्रमुख रूप से शामिल रहे—
गजरा मेहता (राष्ट्रीय सदस्य, आदिवासी एकता परिषद एवं पूर्व अध्यक्ष, आदिवासी समन्वय मंच भारत),
डॉ. कमलसिंह डामोर (प्रांतीय अध्यक्ष, आदिवासी एकता परिषद),
महेश डामोर (प्रदेश अध्यक्ष, आदिवासी छात्र संगठन) सहित प्रकाश बारूड, सरदार गिरवाल, पिंटू डावर, विजय, शंकर गिनवा, लखन वसुनिया, रोहित बड़ुकिया, अर्जुन गिरवाल, पूनम मचार, गगनसिंह भाभर, मानपुर–महू टीम तथा बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस दौरान जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) के महेश्वर तहसील अध्यक्ष जितेंद्र बारिया ने अपने साथियों के साथ यात्रियों का गन्ने का जूस पिलाकर आत्मीय स्वागत किया।
कार्यक्रम एवं जनजागृति रैली के माध्यम से आदिवासी समाज में एकता, सांस्कृतिक पहचान, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक चेतना को मजबूती देने का संदेश दिया गया।

