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तहसीलदार के आदेश हवा में! भीमपुर में अतिक्रमण पर प्रशासन बेबस या मौन सहमति?

 तहसीलदार के आदेश हवा में! भीमपुर में अतिक्रमण पर प्रशासन बेबस या मौन सहमति?

संवाददाता – पप्पू काकोड़िया

भीमपुर/बैतूल (मध्य प्रदेश)

भीमपुर। आदिवासी बहुल भीमपुर तहसील मुख्यालय में कानून और प्रशासनिक आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि खुद तहसीलदार द्वारा जारी किए गए आदेश भी अतिक्रमणकारियों पर बेअसर साबित हो रहे हैं, जिससे प्रशासनिक निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

भीमपुर मुख्यालय में वर्षों से जमे अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। रोज़ाना सैकड़ों ग्रामीणों, महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद तहसील प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है, मानो अतिक्रमण को संरक्षण प्राप्त हो।


दो नोटिस, शून्य कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार तहसीलदार भीमपुर द्वारा अतिक्रमण हटाने को लेकर पहला आदेश 04 नवंबर 2023 तथा दूसरा नोटिस 24 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था। आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि—

एक सप्ताह के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाकर न्यायालय में उपस्थित हों, अन्यथा तहसीलदार द्वारा अतिक्रमण हटाया जाएगा और खर्च की वसूली संबंधित अतिक्रमणकारियों से की जाएगी।

लेकिन सवाल यह है कि जब आदेश इतने स्पष्ट थे, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?क्या प्रशासन दबाव में है, या फिर अतिक्रमणकारियों से किसी तरह की मिलीभगत है""गुरुवार का बाजार, अराजकता का केंद्र ,,,

ग्रामीणों का आरोप है कि हर गुरुवार को लगने वाला साप्ताहिक बाजार अतिक्रमण का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। सड़कों पर अस्थायी दुकानों, ठेलों और अवैध कब्जों के कारण एम्बुलेंस, स्कूल वाहन और आपात सेवाएं तक प्रभावित होती हैं। कई बार दुर्घटना की स्थिति बन चुकी है, लेकिन प्रशासन अब तक किसी बड़े हादसे का इंतजार करता नजर आ रहा है।

आवेदन दर आवेदन, लेकिन कार्रवाई शून्य


सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार लिखित आवेदन देकर तहसीलदार महोदय को अवगत करा चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं। इससे आम जनता में यह धारणा मजबूत हो रही है कि आदिवासी क्षेत्र होने के कारण यहां कानून का डर कम और प्रभाव भी कमजोर है।

कानून की साख पर सवाल

जब तहसीलदार के आदेश ही लागू नहीं हो पा रहे हैं, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे?

यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि पूरे राजस्व एवं जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही है।

अब बड़ा सवाल यह है कि—

क्या जिला कलेक्टर इस मामले में स्वतः संज्ञान लेंगे?

क्या अतिक्रमण हटाने की वास्तविक कार्रवाई होगी या आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगे?

और क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?

भीमपुर की जनता जवाब चाहती है, और अब चुप्पी नहीं—कार्रवाई चाहिए।

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