शिवानंद ओसारी बने ग्राम बबलाई के प्रथम अधिवक्ता, समाज के लिए गौरव का क्षण
प्रदेश संवाददाता: गेंदालाल माकोडे़
महेश्वर (खरगोन)।
दृढ़ इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत के बल पर सफलता प्राप्त की जा सकती है—इस कथन को ग्राम बबलाई के एक साधारण किसान परिवार के होनहार पुत्र शिवानंद ओसारी ने साकार कर दिखाया है। आर्थिक अभावों के बावजूद शिवानंद ने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE-20) उत्तीर्ण कर ग्राम बबलाई के प्रथम अधिवक्ता बनने का गौरव हासिल किया है।
शिवानंद ओसारी, ग्राम बबलाई निवासी गोविंद ओसारी के पुत्र हैं तथा आदिवासी समाज से संबंध रखते हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र एवं आदिवासी समाज के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर विधि के क्षेत्र में यह सफलता समाज के युवाओं के लिए एक सशक्त प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है।
शिवानंद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल बबलाई से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने शासकीय कॉलेज मंडलेश्वर से स्नातक की पढ़ाई पूर्ण की तथा एल.ए.श.ए. विधि महाविद्यालय, धार से कानून की शिक्षा ग्रहण की। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
उनके बड़े भाई एवं जयस जिला सचिव गोपाल ओसारी ने बताया कि शिवानंद का प्रारंभ से ही समाज के लिए कुछ अलग करने और परिवार व क्षेत्र का नाम रोशन करने का सपना था, जो आज उनकी मेहनत और लगन से साकार हुआ है।
इस उपलब्धि पर ग्राम पंचायत बबलाई, शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल बबलाई के प्राचार्य एम.डी. पाटीदार, शिक्षकगण—हेमंत जोशी, राकेश जादव, लक्ष्मण वसुनिया, अशोक पाटीदार, दिलीप सिंह भूरिया, वी. पाटीदार, रामकन्या वसुनिया—सहित ग्रामवासियों, सामाजिक संगठनों एवं समाजजनों ने हर्ष व्यक्त करते हुए शिवानंद ओसारी को बधाइयाँ दीं तथा उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
शिवानंद ओसारी की यह सफलता यह संदेश देती है कि यदि आदिवासी समाज का युवा संकल्प ले, तो वह हर क्षेत्र में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर सकता है।

