टिमरनी: आदिवासी छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए उठी आवाज, जयस ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
टिमरनी (हरदा): आजादी के 78 वर्षों बाद भी टिमरनी क्षेत्र के दूर-दराज से आने वाले एसटी-एससी वर्ग के विद्यार्थी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आर्थिक तंगी और आवास की सुविधा न होने के कारण कई छात्र पढ़ाई छोड़ने या मजदूरी करने को मजबूर हैं। इसी समस्या के निराकरण हेतु जयस (JAYS) के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर अपनी माँगें रखीं।
प्रमुख माँगें और चुनौतियाँ
ज्ञापन में मुख्य रूप से छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास के लिए 8 सूत्रीय माँगें रखी गई हैं:
- कन्या छात्रावास का निर्माण: महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं के लिए 100 से 120 सीटों वाले कन्या छात्रावास की स्वीकृति और शीघ्र निर्माण।
- बालक छात्रावास हेतु भवन: वर्तमान में किराए के भवन में संचालित बालक छात्रावास की असुविधाओं को देखते हुए नवीन शासकीय भवन हेतु भूमि आवंटन और निर्माण।
- आधुनिक सुविधाएँ: छात्रावासों में कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और निशुल्क वाई-फाई की व्यवस्था ताकि ऑनलाइन पढ़ाई सुचारू रूप से हो सके।
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी: निर्धन छात्रों के लिए विभाग द्वारा विशेष कोचिंग और समय-समय पर करियर काउंसलिंग की व्यवस्था।
- खेलकूद का विकास: खेल मैदान की उपलब्धता और जिले के समस्त एसटी-एससी छात्रावासों में खेल सामग्री का वितरण।
"मजदूरी कर पढ़ाई करने को मजबूर हैं छात्राएं"
जयस शिक्षा प्रभारी रोहित कुमरे ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद टिमरनी में छात्राओं के लिए सरकारी छात्रावास न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि कई छात्राएं किराए के कमरों में रहकर और मजदूरी कर अपनी शिक्षा पूरी करने का प्रयास कर रही हैं, जो उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
उपस्थिति: इस दौरान जयस संरक्षक धनसिंह भलावी, प्रभारी राकेश काकोड़िया, उपाध्यक्ष विनोद पदम, रमेश कलम, संदीप उइके सहित बड़ी संख्या में छात्र (सोहित वाडिवा, गोकुल उइके, दीपक धुर्वे, अंकित धुर्वे) एवं छात्राएं (जय श्री कवडे, संजना पंद्भाम, साधना धुर्वे) मौजूद रहीं।


