"आदिवासी युवाओं के आत्मनिर्भर भविष्य की नई गाथा : उद्यमिता, तकनीकी कौशल और नवसाहित्य से सशक्तिकरण का संकल्प"
डॉ. मनोज मड़ावी का आह्वान — "कौशल, सृजन और स्वावलंबन ही आदिवासी समाज की प्रगति का आधार है"
छिंदवाड़ा। मध्य भारत की आदिवासी युवा शक्ति के भविष्य को नई दिशा देने वाला एक प्रेरणादायी वैचारिक महोत्सव पटेल मंगल भवन में उत्साह और उमंग के वातावरण में आयोजित किया गया। गोटूल ट्राइबल वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह एवं करियर मार्गदर्शन महोत्सव ने परंपरा की जड़ों को आधुनिक विकास की संभावनाओं से जोड़ते हुए परिवर्तन का एक सशक्त संदेश दिया।
आशाओं, सपनों और नई ऊर्जा से भरे इस आयोजन में एक विचार बार-बार गूंजता रहा —
"रुकना नहीं है, पुरानी सीमाओं को तोड़ना है, अपनी सांस्कृतिक पहचान को संजोते हुए नए अवसरों का निर्माण करना है।"
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नागपुर से पधारे प्रसिद्ध लेखक, प्रशिक्षक एवं प्रेरणादायी वक्ता प्रा. डॉ. मनोज मड़ावी ने अपने ओजस्वी विचारों से युवाओं के भीतर आत्मविश्वास और स्वावलंबन की नई चेतना जागृत की।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा —
"आदिवासी उद्यमिता, तकनीकी कौशल विकास एवं नवसाहित्य का निर्माण ही आदिवासी सशक्तिकरण की कुंजी है।"
डॉ. मड़ावी ने कहा कि वर्तमान समय केवल रोजगार तलाशने का नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली क्षमता विकसित करने का है। आत्मनिर्भरता ही वास्तविक स्वतंत्रता का मार्ग है। उन्होंने युवाओं को डिजिटल मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, कॉर्पोरेट कौशल, डिजिटल कोचिंग जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों से जुड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ये आधुनिक कौशल आदिवासी युवाओं को न केवल बाजार की प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने में सहायता करेंगे, बल्कि उन्हें स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर भी प्रदान करेंगे।
इस वैचारिक महोत्सव का दूसरा प्रमुख आकर्षण बैतूल स्थित मेडिटेक करियर इंस्टीट्यूट (MCI) के निदेशक डॉ. राजा धुर्वे रहे। उन्होंने युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक विकास का संदेश देते हुए कहा कि सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी प्राप्त करने तक अपने लक्ष्य सीमित न रखें, बल्कि अपने समाज के विकास के लिए आगे आएं, सामाजिक चेतना को मजबूत करें और परिवर्तन के वाहक बनें। उनके विचारों ने उपस्थित विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और जिम्मेदारी की भावना उत्पन्न की।
इस महोत्सव में मध्य भारत के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। अपनी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले 200 से अधिक विद्यार्थियों को गोटूल ट्राइबल वेलफेयर सोसाइटी की ओर से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने युवाओं को करियर, उद्यमिता और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी।
डिप्टी कलेक्टर विक्रमदेव सरियम एवं सहायक आयुक्त अंजलि आहाके ने प्रशासनिक सेवाओं में करियर की संभावनाओं पर मार्गदर्शन दिया। जिला उद्योग प्रतिनिधि रघुवीर सहाय ने उद्योग और स्वरोजगार के नए आयामों पर प्रकाश डाला, जबकि उपविभागीय अधिकारी प्रमोद ऊटी ने कृषि क्षेत्र में उभरते अवसरों और आधुनिक संभावनाओं की जानकारी दी।
पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों में करियर विकल्पों की जानकारी तिरुमल मिथुन धुर्वे ने दी। स्वास्थ्य एवं पोषण के विषय पर डॉ. बबीता ठाकुर ने महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण तथा एनीमिया रोकथाम के उपायों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
आधुनिक कृषि तकनीक एवं खेती में नवाचार के विषय पर तिरुमल श्री सुंदर अलावा ने ग्रामीण युवाओं को उपयोगी मार्गदर्शन दिया। वन विभाग अधिकारी तिरुमला रामदास उईके ने कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए आयोजन को सुव्यवस्थित रूप प्रदान किया।
इस प्रेरणादायी महोत्सव की सफलता के पीछे संस्थापक आर. डी. सलाम का अथक परिश्रम और अध्यक्ष डॉ. तिरुमल हितेश भलावी का समर्पण महत्वपूर्ण रहा। गोटूल ट्राइबल वेलफेयर सोसाइटी के सचिव तिरुमल आसाराम वाडीवा एवं सभी युवा कार्यकर्ताओं की मेहनत ने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक प्रयासों से सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं था, बल्कि आदिवासी समाज के नव निर्माण का एक विचार आंदोलन था। उद्यमिता, तकनीकी ज्ञान, शिक्षा और साहित्यिक अभिव्यक्ति के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाने का यह प्रयास आने वाले समय में एक नई सामाजिक चेतना का आधार बनेगा।
यह महोत्सव इस संदेश के साथ समाप्त हुआ कि जब युवा अपनी संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक ज्ञान और कौशल को अपनाते हैं, तब विकास की नई कहानी लिखी जाती है। निश्चित ही यह ऊर्जा भविष्य में आदिवासी सशक्तिकरण की एक नई क्रांति का स्वर बनेगी।

