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भीलआमला के आदिवासियों ने पुलिस व वन विभाग पर उत्पीड़न का लगाया आरोप, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

संवाददाता अनारसिंह चौहान

कमलापुर/ बागली (देवास), 16 जून। देवास जिले की बागली तहसील के ग्राम भीलआमला के ग्रामीणों एवं आदिवासी समाज के लोगों ने पुलिस प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों पर बेवजह परेशान करने, मारपीट करने तथा गांव में भय का माहौल बनाने का आरोप लगाते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बागली को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।


ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि 13 जून को वन विभाग की टीम गांव पहुंची और बिना पूर्व सूचना दिए आदिवासी किसानों के खेतों में गड्ढे खोदने सहित अन्य गतिविधियां कीं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा न तो कोई स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही कार्रवाई के संबंध में पूर्व सूचना प्रदान की गई।

ग्रामीणों के अनुसार बाद में वन विभाग के कर्मचारियों ने कुछ लोगों को कागजात दिखाने के बहाने बुलाया, जहां उनके साथ मारपीट की गई तथा उन्हें जबरन वाहनों में बैठाकर ले जाया गया। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि विरोध जताने पर वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा फायरिंग की गई, जिससे गांव में दहशत का माहौल बन गया और लोग डरकर इधर-उधर भागने लगे।


ग्रामीणों ने दावा किया कि घटना के कुछ समय बाद पुलिस प्रशासन ने गांव के कुछ लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। साथ ही महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई से पूरे गांव में भय का वातावरण व्याप्त है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि वे वर्ष 1998 से संबंधित भूमि पर निवास एवं खेती कर रहे हैं तथा वनाधिकार संबंधी दावों के लिए समय-समय पर आवेदन भी प्रस्तुत करते रहे हैं। उनका कहना है कि पूर्व में दर्ज मामलों में लगाए गए जुर्माने का भुगतान भी किया जा चुका है।


ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से किए जा रहे उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा आदिवासी समाज के लोगों को बिना वजह परेशान न करने के निर्देश जारी किए जाएं।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रकार की कार्रवाई जारी रही तो आदिवासी समाज भविष्य में आंदोलन करने के लिए बाध्य हो सकता है। ज्ञापन की प्रतिलिपि पुलिस अनुविभागीय अधिकारी एवं वन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी को भी भेजी गई है।

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